जब कर्ज में डूबकर पाई-पाई को मोहताज हो गए थे भारत भूषण, भाई की सलाह ने कर दिया था कंगाल!


Bharat Bhushan Life Facts: गुजरे ज़माने के बेहतरीन एक्टर भारत भूषण की 14 जून को बर्थ एनिवर्सरी है. यह वाकया उन दिनों का है जब भारत भूषण (Bharat Bhushan) एक्टर बनने मुंबई आए थे और काम की तलाश में थे. भारत भूषण जब मुंबई पहुंचे तो उनके पास मशहूर डायरेक्टर महबूब खान (Mehboob Khan) के लिए एक सिफारिश पत्र था. उस वक्त महबूब खान मुंबई के एक स्टूडियो में अलीबाबा चालीस चोर की शूटिंग कर रहे थे. भारत भूषण ने उन्हें वह पत्र दिखाया लेकिन तब तक फिल्म में कोई रोल नहीं बचा था. महबूब ने भारत भूषण का सिफारिशी पत्र नजरअंदाज कर दिया.

इससे भारत भूषण काफी निराश हो गए तभी किसी ने उन्हें डायरेक्टर रामेश्वर शर्मा के बारे में बताया कि वह भक्त कबीर नाम फिल्म बना रहे हैं तो वहां काम मिल सकता है. भारत तुरंत रामेश्वर से मिलने शूटिंग सेट पर पहुंचे लेकिन उनकी डायरेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी. यहां भी उन्हें मालूम चला कि बस काशी नरेश का एक छोटा रोल ही बचा है और फिल्म की बाकी कास्ट तय की जा चुकी है.

भारत भूषण फिर मायूस हो गए और लौटने लगे तभी रामेश्वर शर्मा वहां आ गए और उन्होंने भूषण को कैबिन में मिलने के लिए बुलाया. उन्होंने काशी नरेश का रोल देते हुए भारत भूषण को 60 रुपए प्रतिमाह की नौकरी पर रख लिया. इस फिल्म के बाद भारत भूषण चमक गए और इसके बाद उन्होंने भाईचारा, सावन, जन्माष्टमी, बैजू बावरा, मिर्जा गालिब जैसी कई फिल्मों में काम किया. ये वो दौर था, जब किस्मत भारत भूषण पर मेहरबान थी.

देखते ही देखते उन्होंने मुंबई में न सिर्फ कई बंगले खरीद लिए बल्कि महंगी-महंगी कारें भी खरीद लीं. इसी बीच भारत भूषण के बड़े भाई रमेश ने उन्हें प्रोड्यूसर बनने की सलाह दी. भारत ने बड़े भाई का कहना माना और कई फिल्में प्रोड्यूस कीं. इनमें से दो फिल्में ‘बसंत बहार’ और ‘बरसात की रात’ सुपरहिट हुईं और भारत भूषण मालामाल हो गए. उनके पास काफी पैसा आ गया. लेकिन अफसोस कि बाद में उन्होंने जितनी भी फिल्में बनाईं वो सब फ्लॉप होती गईं. ऐसे में भारत भूषण कर्ज में डूब गए और पाई-पाई को मोहताज हो गए. 10 अक्टूबर, 1992 को 72 साल की उम्र में तंगहाली से जूझते-जूझते भारत भूषण दुनिया छोड़कर चले गए.



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